Tuesday, October 20th, 2026

किसान आंदोलन: राकेश टिकैत के आंसुओं से उबला, दिन-भर रही कुछ ऐसी हलचल

नई दिल्ली 
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait News) के आंसुओं से आंदोलन को नई राह मिल गई है। गुरुवार रात तक सैकड़ों लोगों में सिमट कर रह गए आंदोलन में शनिवार को भारी भीड़ रही। अनुमान के मुताबिक, दिन में छह हजार से ज्यादा लोग आंदोलन के समर्थन में गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। यह सब राकेश टिकैत के भावनात्मक खिंचाव की कल्पना का परिणाम है। इससे उस किसान आंदोलन में फिर से गति आ गई जो गणतंत्र दिवस समारोह में हिंसा होने के बाद खो गई थी। दरअसल केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ बीते दो महीने से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। इसमें सिंघू, गाजीपुर और टिकरी बार्डर शामिल हैं। इन किसानों में अधिकतर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। अब, ध्यान दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर स्थानांतरित हो गया है जहां किसान हजारों की संख्या में अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं।

राकेश टिकैत के भावनात्मक अपील के बाद किसान आंदोलन में हजारों की भीड़ पहुंची रही है। ऐसे में बीकेयू के मेरठ क्षेत्र प्रमुख पवन खताना ने कहा कि आंदोलन मजबूत था और है। यह कोई राजनीतिक प्रदर्शन नहीं है। बीकेयू और राकेश टिकैत की विचारधारा से सहमति रखने वाले किसी भी व्यक्ति का यहां स्वागत है। लेकिन अंत तक आंदोलन में नहीं डटे रहने की इच्छा रखने वाले लोगों से हमारी अपील है कि बीच में ही छोड़ कर जाने के लिए कृपया यहां नहीं आइए। किसान आंदोलन में लगातार भीड़ और लोगों का समर्थन एक बार फिर बढ़ने लगा है। शुक्रवार रात बीकेयू पदाधिकारियों ने गाजीपुर में करीब 10,000 लोगों की मौजूदगी होने का अनुमान लगाया था, जबकि गाजियाबाद पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह संख्या करीब पांच से छह हजार थी। सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखने के राकेश टिकैत के आह्वान ने एक गहरा भावनात्मक माहौल पैदा किया। उनका वीडियो कई सोशल मीडिया मंचों पर वायरल हुआ। इसके बाद उनके भाई नरेश टिकैत ने शुक्रवार को अपने गृह नगर मुजफ्फरनगर में एक 'महापंचायत' का आयोजन किया, जहां हज़ारों किसान आंदोलन का समर्थन करने के लिए एकत्रित हुए। गाजीपुर बॉर्डर पर भीड़ गुरुवार की रात घटकर अगले 12 घंटे में कई गुना बढ़ गई और अगले 24 घंटों में 5,000 से अधिक हो गई। किसान आंदोलन न केवल पुनर्जीवित हुआ बल्कि उसमें नयी ऊर्जा आ गई।

उत्तर प्रदेश से लगी गाजीपुर सीमा पर दिल्ली-मेरठ हाइवे पर शनिवार को किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए और भी ग्रामीण पहुंचे। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ यहां बीकेयू नीत प्रदर्शन में गुरुवार को कुछ कम भीड़ नजर आ रही थी, लेकिन इसके बाद और भी प्रदर्शनकारी आंदोलन में शामिल हुए हैं। इस दौरान हर किसान की नजर मंच पर राकेश टिकैत के भाषण पर ही लगी रही। केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ गत दो महीने से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। इसमें सिंघू, गाजीपुर और टिकरी बार्डर शामिल हैं। इन किसानों में अधिकतर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। अब, ध्यान दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर स्थानांतरित हो गया है जहां किसान हजारों की संख्या में अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं। किसान आंदोलन में राकेश टिकैत के आंसुओं के बाद लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। दिल्ली हिंसा के बाद आंदोलन के खात्मे की राह देख रहे प्रशासन ने बढ़ती भीड़ को लेकर दोबारा से कमर कस ली है। आंदोलन स्थल के आसपास बैरीकेडिंग के साथ ही अन्य जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि लोगों की भीड़ को स्थिर रखा जाए।
 

 

#किसान आंदोलन

Source : Agency

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